Saturday, 13 July 2013

दो कदम...

हवाओं में मोहब्बत की चलो खुशबू बिखेरें अब
कि नफ़रत के ज़हर में अब जिया जाता नहीं पल भर
ज़रूरी है पहल करके बढ़ाएँ दो कदम हम तुम
कहीं बच्चों का भोलापन न ले ले खौफ़ का मंज़र.....

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