उसके साथ के पल
कितने छोटे लगते हैं;
हाँ,
जितने होते हैं, उससे भी कहीं छोटे
समय बीतता नहीं
उड़ता है पंख लगाकर.
मगर यही छोटे पल
बीतने के बाद
ख़ुशी भर जाते हैं
अगले कई दिनों में
अपनी यादों से.
जब अकेले में
मैं मुस्कुराता हूँ
हँसता हूँ
सीटी बजाता हूँ
और न जाने क्या क्या करता हूँ
अनायास.
इन्ही सब के ज़रिये तो
ख़ुशी छलकती जाती है
उन छोटे पलों की
कई दिनों तक.
जैसे इत्र की एक बूँद
महकाती है देर तक
सारी हवा.
No comments:
Post a Comment